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Sunday, April 9, 2017

उसको तो बहुत फरक पड़ता है ना !!!

उसको तो बहुत फरक पड़ता है ना !!!



उसको तो बहुत फरक पड़ता है ना !!!
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समुन्द्र में बहुत जोर का तुफान आया और बड़ी बड़ी लहरे तट से आगे आकर अपनी हदें तोड़ रही थी । प्रशासन पहले ही तट पर रहने वालों को समुन्द्र तट से पीछे सुरक्षित जगह लेकर जा चुका था । दो घण्टे के उपद्रव के बाद समुन्द्र का कोप शान्त हुआ और लोग समुन्द्र के किनारे बने अपने आशियानों की तरफ लौटे । 8 साल का मोहन भी अपनी माँ के साथ अपने उजड़े हुये समुन्द्र तट पर पहुँचा । वहॉ क्या देखता है कि हजारों की तादाद में मछलियॉ तट की रेत में पड़ी तड़प रही हैं । मोहन दौड़ कर उन तड़पती हुयी मछलियों के बीच पहुँचा और एक मछली को उठाकर वपस समुन्द्र में फेंक दिया । उसके बाद उसने दूसरी मछली को उठाया और उसको भी समुन्द्र में फेंक दिया । फिर तो एक मशीन की तरह वो लगातार मछलियों को समुन्द्र में फेंकने लगा ।
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उसकी माँ ने उसको देखा तो बोली यहॉ हजारों मछलियॉ पड़ी हुयी तड़प रही है । तू अगर सौ दो सौ मछलियों को समुन्द्र में फेंक भी देगा तो क्या फरक पड़ जायेगा । मोहन ने अपनी माँ की तरफ एक नजर देखा और कुछ रुका । उसने फिर से एक मछली उठाई और उसको समुन्द्र में फेंका और अपनी माँ से बोला, " माँ इसको तो फरक पड़ता है ना " दूसरी मछली को उठाया और उसको समुन्द्र में फेंक कर बोला " माँ इसको भी फरक पड़ता है " और मछली को फेंकते हुये जोर जोर से यही चिल्लाने लगा, " माँ इसको भी फरक पड़ता है "
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उसको ऐसा करते देख तट पर मौजूद और भी लोगों ने तट पर पड़ी मछलियों में से जिन्दा मछलियों को समुन्द्र में फेंकना शुरू कर दिया । कुछ ही मिनटों में तट पर पड़ी सभी जिन्दा मछलियॉ समुन्द्र में वापस फेंकी जा चुकी थी । वो माँ अपने छोटे से मोहन को बस एकटक देखती ही रह गयी । जिन मछलियों के तट पर पड़े होने से गन्दगी फैल रही थी अब वो ही मछलियॉ वापस समुन्द्र में पहुँच कर पानी की सुन्दरता बढ़ा रही थी ।
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सीख :- विकट परिस्थितियों में जब हम अपना बहुत कुछ गवा चुके हों, उस वक्त भी हम परोपकार करके दूसरों को उनका सब कुछ लौटा सकते है ।