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Sunday, April 9, 2017

वो छोटी सी धुँयें की दीवार

वो छोटी सी धुँयें की दीवार



वो छोटी सी धुँयें की दीवार
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सुबह सुबह शीशे में मुँह देखते हुये मदन को महसूस हुआ कि शीशा एक जगह से चटक गया है, अपनी दादी की बचपन में कही बात याद आ गयी कि टूटे शीशे में मुँह देखना शुभ नही होता । मन ही मन बोला "ठीक है दादी, आज ही पैंठ में से नया शीशा जरूर ले आऊँगा । " शायद दादी भगवान के घर से बैठी उसकी बात सुन रही थी । फिर अपने आप से ही बात करने लगा " अब और क्या अशुभ होगा, एक ही छोटा भाई है और वो भी बीवियों के झगड़े के कारण अभी चार दिन पहले ही अपना हिस्सा लेकर अलग हो गया ।" सारी बातें एक बार फिर आँखों के सामने घिरने लगी और घर की दोनों औरतों के क्रोध के तीखे बोल एक बार फिर उसके कानों में गूँजने लगे । थके थके कदमों से हाट जाने के लिये वो अपने कमरे से बाहर निकला तो मजदूर घर के आँगन में ईंट और गारा की दीवार खड़ी करने की तैयारी कर रहे थे । आँखों में दबी सी नमी लेकर दरवाजे से बाहर निकलने को कदम बढ़ाये ही थे कि छोटे भाई शंकर की 4 साल की बेटी मानसी अपने हाथों में खाली गिलास लेकर, दूध निकालती हुयी अपनी ताई की तरफ चल गयी । 
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जायदाद के बटवारे में गाय बड़े भाई के हिस्से में आ गयी थी और बैल छोटे भाई के हिस्से में चला गया था । उसका मन एक आशंका से काँप उठा, " हो ना हो कमला ( मदन की बीवी ) बच्ची के हाथ से गिलास लेकर अभी जमीन पर पटक देगी । वो ये सब नही देख पायेगा, मानसी उसको बड़ा पापा बोलती है । दिल में दर्द का गुबार लिये वो वापस अपने कमरे में ही घुस गया और चोरो की तरह जंगले में से अपनी पत्नी और मानसी को देखने लगा । बस इन्तजार ही कर रहा था कि अब कमला के चीखने की आवाज उसके कानों में पड़ेगी । लेकिन, ये क्या ?
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कमला ने मानसी के हाथों से गिलास लिया और चोर नजरों से चारो तरफ देखा, फिर बड़ी तल्लीनता से मानसी के गिलास को दूध से लबालब भर दिया । मानसी भी ताजा निकाला हुआ दूध अपनी ताई के पास ही बैठ कर गटागट पी गयी और बालसुलभ चंचलता से अपने कमरे में भाग गयी उसको भी डर था कि कही मम्मी देख ना ले और डाँट ना पड़ जाये । ये देख मदन की आँखों की चमक आ गयी और वो खुशी का मारा अपने घर के दरवाजे से बाहर निकला, चारो तरफ देखा और मौहल्ले वालों को सुनाने के लिये ऊँची आवाज में बोला " शंकर मै पैंठ में जा रहा हूँ, घर का सामान लेता आऊँगा, तुम ये आँगन साफ करवा देना ।
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मासूम बच्चे की एक सामान्य सी हरकत से धुँयें की वो दिवार जो चार दिन से सारी जिन्दगी को टुकड़े टुकड़े किये हुये थी एक ही पल में धुँयें की तरह ही उड़ गयी ।
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सीख :- रिश्ते बहुत नाजुक होते हैं उनको छोटी छोटी बातों से नादानी में तोड़ा नही करते हैं ।